समुद्री शैवाल की खेती से आय के नए स्रोत


10 / 21

Authors

  • अमित सोलंकी 9105809864

Keywords:

समुद्री शैवाल, सीवीड की खेती, समुद्री जैव संपदा, सतत विकास, सीवीड मिशन भारत

Abstract

समुद्री शैवाल (Seaweed) एक महत्वपूर्ण समुद्री जैव संसाधन है, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पोषण, औषधि, कृषि, सौंदर्य प्रसाधन और जैव ईंधन उत्पादन जैसे विविध क्षेत्रों में बहुआयामी उपयोगिता रखता है। यह बिना फूलों वाला पौधा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में भोजन, ऑक्सीजन और आवास प्रदान करता है तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है। भारत में तमिलनाडु, गुजरात, लक्षद्वीप एवं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में इसकी खेती की जा रही है, जो ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। सरकार द्वारा आरंभ किए गए “सीवीड मिशन” और विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना से इस क्षेत्र को संस्थागत समर्थन प्राप्त हुआ है। यद्यपि तकनीकी ज्ञान की कमी, पर्यावरणीय जोखिम और विपणन समस्याएँ प्रमुख चुनौतियाँ हैं, फिर भी यह संसाधन सतत विकास, हरित ऊर्जा और पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो सकता है।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Submitted

2025-10-15

Published

2026-08-13

How to Cite

अमित सोलंकी. (2026). समुद्री शैवाल की खेती से आय के नए स्रोत. खेती, 79(4), 31-33. http://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1555