सामुदायिक प्रयासों से मत्स्य संरक्षण


19 / 14

Authors

  • प्रणब गोगोई ICAR-Central Inland Fisheries Research Institute
  • दीपेन्द्र सिंह भाकृअनुप-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसन्धान संस्थान बैरकपुर, कोलकाता- 700120
  • थांगजम निरुपदा चानू भाकृअनुप-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसन्धान संस्थान बैरकपुर, कोलकाता- 700120
  • अजय साहा भाकृअनुप-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसन्धान संस्थान बैरकपुर, कोलकाता- 700120

Abstract

मछली अभयारण्य आंतरिक जल स्रोतों में मछलियों की संख्या बढ़ाने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने का एक प्रभावी तरीका है। यह जलीय पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने और मत्स्य संसाधनों के लंबे समय तक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामुदायिक आधारित मछली अभयारण्य आमतौर पर नदी या तालाब के कुछ हिस्सों, विशेषकर गहरे जल वाले क्षेत्रों में बनाए जाते हैं। इन स्थानों को स्थानीय लोग मिलकर सुरक्षित रखते हैं, जहाँ मछली पकड़ने पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाया जाता है। ये क्षेत्र गर्मी या सूखे के समय मछलियों के लिए सुरक्षित आश्रय का काम करते हैं और उनके प्रजनन में मदद करते हैं। भारत में मछली अभयारण्यों की परंपरा बहुत पुरानी है। पहले भी स्थानीय समुदाय धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से जल स्रोतों और मछलियों की रक्षा करते रहे हैं। ऐसे अभयारण्य छोटे (लगभग 50 मीटर) से लेकर बड़े (20 किलोमीटर) नदी क्षेत्रों या तालाबों तक फैले हो सकते हैं, जहाँ मछली पकड़ने, बालू खनन और अन्य हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Submitted

2026-04-03

Published

2026-08-13

How to Cite

प्रणब गोगोई, सिंह द., चानू थ. न. ., & साहा अ. (2026). सामुदायिक प्रयासों से मत्स्य संरक्षण. खेती, 79(4), 17-19. http://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1906