चिरोंजी उत्पादन की संभावनाएं


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Authors

  • Akhilesh Kumar Srivastava BUAT, Banda- 210001
  • पंकज कुमार ओझा ७३५५३७३९८१
  • Siddharth Kumar BUAT, Banda- 210001
  • Pragya Ojha Krishi Vigyan Kendra, Banda- 210001

Keywords:

चिरौंजी की खेती, चार (चिरौंजी, सूखा मेवा फसल , कम वर्षा वाले क्षेत्र

Abstract

बुंदेलखंड, उत्तर भारत का एक विशिष्ट क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मध्य फैला हुआ है। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। पथरीली मिट्टी, कम वर्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था बुंदेलखंड की प्रमुख विशेषताएँ हैं। यहाँ की जलवायु एवं मृदा परिस्थितियाँ अनेक पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं, जिनमें चिरौंजी की खेती एक उभरता हुआ और आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प बनकर सामने आई है। चिरौंजी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चार’ या ‘चिरौंजी’ कहा जाता है, एक बहुमूल्य सूखा मेवा है। इसके बीजों के साथ-साथ अन्य भागों का उपयोग खाद्य, औषधीय एवं कॉस्मेटिक उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है। बढ़ती बाजार मांग और बेहतर मूल्य के कारण चिरौंजी की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। प्रस्तुत लेख में बुंदेलखंड क्षेत्र में चिरौंजी की खेती की संभावनाओं, इसके लाभ, प्रमुख चुनौतियों तथा उनके व्यावहारिक समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

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Author Biographies

  • Akhilesh Kumar Srivastava, BUAT, Banda- 210001

    Prof. Akhilesh Kumar Srivastava

    Head, Department of Fruit Science, BUAT, Banda- 210001

  • Siddharth Kumar, BUAT, Banda- 210001

    Mr. Siddharth Kumar

    Research Scholar, Department of Fruit Science, BUAT, Banda- 210001

  • Pragya Ojha, Krishi Vigyan Kendra, Banda- 210001

    Dr. Pragya Ojha

    Subject Matter Specialist (Home Science), Krishi Vigyan Kendra, Banda- 210001

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Submitted

2026-01-07

Published

2026-03-30

How to Cite

Srivastava, A. K., ओझा प. क., Kumar, S., & Ojha, P. (2026). चिरोंजी उत्पादन की संभावनाएं. फल फूल, 47(2). http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1654