बहुमूल्य औषधीय फल घिंगारू


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Authors

  • Mandeep Rawat Assistant Professor, Teerthanker Mahaveer University, Moradabad Uttar Pradesh

Keywords:

घिंगारू, पाइराकेंथा, औषधीय वनस्पति

Abstract

पाइराकेंथा, जिसे स्थानीय रूप से घिंगारू या हिमालयी अग्निकाँट के नाम से जाना जाता है, हिमालयी क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण औषधीय जंगली प्रजाति है। यह सदाबहार झाड़ी तीखे कांटों से युक्त होती है, जिससे त्वचा के संपर्क में आने पर दर्द और सूजन हो सकती है। इसके चमकीले लाल फल पारंपरिक रूप से पेट संबंधी विकारों के उपचार और लोक आहार में उपयोग किए जाते रहे हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि पाइराकेंथा के फलों में कैंसररोधी, सूजनरोधी, मधुमेहरोधी, जीवाणुरोधी एवं कवकरोधी गुण मौजूद हैं। यही गुण इसे न केवल औषधीय, बल्कि पोषण संबंधी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।

पाइराकेंथा का प्राकृतिक आवास 1000–2700 मीटर की ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में है। यह दक्षिण-पश्चिम यूरोप से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली हुई है। भारत में इसकी उपस्थिति जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाटों तक देखी जाती है।

इस अल्प-प्रयुक्त जंगली फल का पहचान, संरक्षण और उपयोग स्थानीय समुदायों के आजीविका संवर्धन के साथ-साथ व्यापक जनसंख्या के पोषण और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Author Biography

  • Mandeep Rawat, Assistant Professor, Teerthanker Mahaveer University, Moradabad Uttar Pradesh

    Assistant Professor, horticulture, Teerhanker Mahaveer University, Moradabad, UP

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Submitted

2026-01-22

Published

2026-03-30

How to Cite

Rawat, M. (2026). बहुमूल्य औषधीय फल घिंगारू. फल फूल, 47(2). http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1710