सामुदायिक बीज बैंक द्वारा जैव विविधता का सशक्तिकरण


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Authors

  • निखिल ठाकुर डॉ यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन (हि. प्र.)
  • जसदीप कौर चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर, कांगड़ा (हि. प्र.)
  • दीपा शर्मा डॉ यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन (हि. प्र.)।
  • विनीत शर्मा डॉ यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन (हि. प्र.)

Abstract

भारत की कृषि प्रणाली सदियों से जैव विविधता पर आधारित रही है, जहाँ किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों एवं उनकी पारंपरिक किस्मों का संरक्षण किया है। किंतु आधुनिक कृषि पद्धतियों, संकर बीजों पर बढ़ती निर्भरता, जलवायु परिवर्तन और एकरूपी खेती के कारण कृषि जैव विविधता निरंतर क्षीण हो रही है। इस परिप्रेक्ष्य में सामुदायिक बीज बैंक (Community Seed Banks) जैव विविधता संरक्षण, किसानों की आत्मनिर्भरता, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा टिकाऊ कृषि का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। ये बीज बैंक स्थानीय स्तर पर देशी एवं पारंपरिक बीजों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और आदान-प्रदान के माध्यम से कृषि-परिस्थितिकी को मजबूत करते हैं। प्रस्तुत लेख में सामुदायिक बीज बैंकों की अवधारणा, उनकी कार्यप्रणाली, जैव विविधता संरक्षण में भूमिका, किसानों की आजीविका पर प्रभाव, सामाजिक-आर्थिक लाभ, चुनौतियाँ एवं भविष्य की संभावनाओं पर सरल एवं लोकप्रिय शैली में प्रकाश डाला गया है।

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Submitted

2026-02-06

Published

2026-07-16

How to Cite

ठाकुर न. ., कौर ज. ., शर्मा द. ., & शर्मा व. . (2026). सामुदायिक बीज बैंक द्वारा जैव विविधता का सशक्तिकरण. फल फूल, 47(4). http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1737