रतनजोत का प्राकृतिक खेती में प्रभावी योगदान


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Authors

  • दीपक हरि रानडे भगवंत राव मंडलोई कृषि महाविद्यालय, राजमाता विजयाराजे सिंध्यिा कृषि विश्वविद्यालय, खंडवा-450001
  • मनोज कुरील भगवंत राव मंडलोई कृषि महाविद्यालय, राजमाता विजयाराजे सिंध्यिा कृषि विश्वविद्यालय, खंडवा-450001
  • सुनील अर्सिया भगवंत राव मंडलोई कृषि महाविद्यालय, राजमाता विजयाराजे सिंध्यिा कृषि विश्वविद्यालय, खंडवा-450001
  • स्मिता अग्रवाल भगवंत राव मंडलोई कृषि महाविद्यालय, राजमाता विजयाराजे सिंध्यिा कृषि विश्वविद्यालय, खंडवा-450001

Abstract

वर्तमान समय में कृषि प्रणाली गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यध्कि उपयोग से न केवल उत्पादन लागत बढ़ी है, बल्कि मृदा की उर्वरता, पर्यावरणीय संतुलन और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे परिदृश्य में टिकाऊ, कम लागत और पर्यावरण अनुकूल कृषि विकल्पों की आवश्यकता पहले से कहीं अध्कि महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में रतनजोत जैसा बहुउद्देशीय पौध किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए एक आशाजनक समाधन के रूप में उभरकर सामने आया है। यह पौध एक ओर प्राकृतिक बाड़बंदी, मृदा संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर इसके बीजों से प्राप्त तेल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। खंडवा कृषि महाविद्यालय परिसर में लगाए गए रतनजोत के पौधे न केवल हरियाली बढ़ा रहे हैं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए एक जीवंत माॅडल भी प्रस्तुत कर रहे हैं।

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Submitted

2026-03-27

Published

2026-03-30

How to Cite

दीपक हरि रानडे, मनोज कुरील, सुनील अर्सिया, & स्मिता अग्रवाल. (2026). रतनजोत का प्राकृतिक खेती में प्रभावी योगदान. फल फूल, 47(2), 7-8. http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1880