जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोगी-गुच्छी मशरूम


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Authors

  • सचिन गुप्ता प्रोफेसर एवं इंचार्ज मशरूम यूनिट शेर-ए-कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-जम्मू
  • हेमा त्रिपाठी सह निदेशक, प्रसार, शेर-ए- कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-जम्मू
  • मोनी गुप्ता विभागाध्यक्ष, जीव रसायन विभाग, शेर-ए- कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-जम्मू
  • मेघा अबरोल शोध् छात्रा, पादप व्याधि विज्ञान विभाग, शेर-ए- कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-जम्मू

Abstract

भारत में स्थानीय रूप से गुच्छी कहलाने वाली मोरेल्स प्रजाति एक अत्यध्कि मूल्यवान जंगली मशरूम है, जो अपने सांद्र स्वाद, पोषण-समृद्धि और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह कवक प्राकृतिक रूप से शीतोष्ण वनों में, विशेषकर शंकुधरी वृक्षों के साथ सहजीवी संबंध् में उगता है और विशिष्ट जलवायु परिस्थितियों में मौसमी रूप से दिखाई देता है। जम्मू-कश्मीर सहित हिमालयी क्षेत्रों में गुच्छी मशरूम का गहरा सांस्कृतिक महत्व है तथा यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इन्हें पारंपरिक रूप से जंगलों से एकत्रित कर सुखाया जाता है और घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उच्च कीमतों पर बेचा जाता है। प्रोटीन, विटामिन, खनिज और जैव-सक्रिय यौगिकों से समृद्ध होने के कारण इन्हें स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ-साथ पारंपरिक औषधीय उपयोगों के लिए भी महत्व दिया जाता है। इस प्रकार गुच्छी मशरूम पारिस्थितिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गैर-लकड़ी वन उत्पाद माने जाते हैं

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Submitted

2026-03-27

Published

2026-03-30

How to Cite

सचिन गुप्ता, हेमा त्रिपाठी, मोनी गुप्ता, & मेघा अबरोल. (2026). जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोगी-गुच्छी मशरूम. फल फूल, 47(2), 39-41. http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1887