पूर्वी भारत में बीजू आम की विविधता का संरक्षण


12093 / 60

Authors

  • संजय कुमार सिंह प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ-226101
  • अंजू बाजपेयी अध्यक्ष, फसल सुधार एवं जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ-226101
  • टी. दामोदरन निदेशक, भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, डाकघर-काकोरी, लखनऊ-226101

Abstract

भारत में बागवानी पफसलों की खेती निरंतर लोकप्रिय हो रही है। अब केवल पारंपरिक किसान ही नहीं, बल्कि शिक्षित एवं पेशेवर लोग भी रोजगार छोड़कर फल बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बागवानी इन्हें प्रकृति और अपनी मिट्टी से जुड़ाव का सुकून देने के साथ बेहतर आय का अवसर भी प्रदान कर रही है। कई लोगों के लिए यह केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और ग्रामीण विरासत से पुनः जुड़ने का माध्यम भी बन गई है। बीती शताब्दी के मध्य तक बिहार अपने घने वनों और प्राकृतिक रूप से विकसित बीजू आम के वृक्षों के लिए प्रसिद्ध था। इन वनों में बीजू आम की असंख्य स्थानीय किस्में अपने विशिष्ट स्वाद, मिठास, रस एवं सुगंध् के लिए जानी जाती थीं। किंतु अस्सी के दशक में प्लाई उद्योग के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में पुराने वृक्षों की कटाई शुरू हुई और धीरे-धीरे बीजू आम की यह समृद्ध विविधता समाप्त होती चली गई। आज अनेक पारंपरिक बीजू आम केवल स्मृतियों तक सीमित होकर रह गए हैं।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Submitted

2026-07-09

Published

2026-07-16

How to Cite

संजय कुमार सिंह, अंजू बाजपेयी, & टी. दामोदरन. (2026). पूर्वी भारत में बीजू आम की विविधता का संरक्षण. फल फूल, 47(4), 13-15. http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/2125