विविधता से भरपूर भौगोलिक संकेतक फल


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Authors

  • प्रकाश पाटिल भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधन संस्थान, बेंगलुरु, कर्नाटक
  • भूपेन्द्र सागोरे सहायक संचालक उद्यानिकी, जिला भिण्ड, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, भोपाल, मध्य प्रदेश
  • बृजेश कुमार यादव पीएच.डी. शोधर्थी, खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी संभाग, भाकृअनुप-भाकृअनुसं, नई दिल्ली
  • वाणी एन. यू वरिष्ठ अनुसंधन अध्येता, परियोजना समन्वयक (फल) कार्यालय, भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधन संस्थान, बेंगलुरु, कर्नाटक

Abstract

भारत अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं जैविक विविधता के कारण विश्व में विशिष्ट स्थानरखता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित फल अपनी अनूठी गुणवत्ता, स्वाद, सुगंध एवं पारंपरिक खेती पद्वतियों के कारण अलग पहचान बनाते हैं। भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग ऐसे विशिष्ट पफलों की मौलिकता, क्षेत्राीय विरासत और किसानों के अधिकारों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम है। प्रस्तुत लेख में भारत के जीआई टैग प्राप्त फलों की विशेषताओं, उत्पादन क्षेत्रों, पारंपरिक एवं वैज्ञानिक खेती तकनीकों तथा उनके सामाजिक-आर्थिक
महत्व का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, इन फलों की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग, निर्यात क्षमता, ब्रांड मूल्य और किसानों की आय बढ़ाने में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। लेख में सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं, विपणन, प्रसंस्करण तथा संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है। यह अध्ययन भारतीय जीआई फलों की समृद्ध विरासत को उजागर करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने तथा "वोकल फॉर लोकल"और ‘‘आत्मनिर्भर भारत‘‘ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करता है।

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Submitted

2026-07-10

Published

2026-07-16

How to Cite

प्रकाश पाटिल, भूपेन्द्र सागोरे, बृजेश कुमार यादव, & वाणी एन. यू. (2026). विविधता से भरपूर भौगोलिक संकेतक फल. फल फूल, 47(4), 18-23. http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/2130