खस-खस की वैज्ञानिक खेती


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Authors

  • सन्तोष चौधरी सहायक प्राध्यापक, उद्यान विज्ञानद्ध कृषि महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान
  • नन्द किशोर जाट सहायक प्राध्यापक, उद्यान विज्ञानद्ध कृषि महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान
  • सुधीर कुमार सहायक प्राध्यापक, उद्यान विज्ञानद्ध कृषि महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान

Abstract

खस, भारतीय मूल की एक सगंधीय बहुवर्षीय घास है। इसे आमतौर पर खस-खस घास के नाम से भी जाना जाता है। भारत में इसकी खेती राजस्थान, असोम, बिहार, उत्तरप्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश में की जाती है। व्यावसायिक पफसल होने के साथ-साथ यह मृदा अपरदन को रोककर मिट्टी की नमी को बनाए रखने में मदद करती है तथा मिट्टी के भौतिक गुणों में सुधर करती है। इस घास की ऊंचाई 2-3 मीटर, पत्तियों की लम्बाई 120-150 सेंमी. और चैड़ाई 0.8 सेंमी. होती है। इस घास की जड़ें 2-4 मीटर गहराई तक बढ़ती हैं। इसकी खेती मुख्यतौर पर इसकी जड़ों में पाये जाने वाले सुगन्ध्ति तेल के लिए की जाती है। इस तेल के मुख्य रासायनिक घटक-बेंजोइक एसिड, वेटिवरोल, फरफ्रयूरोल और वेटिवीन होते हैं।

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Submitted

2022-11-16

Published

2022-11-16

How to Cite

चौधरी स., जाट न. क., & कुमार स. (2022). खस-खस की वैज्ञानिक खेती. फल फूल, 43(6), 33-34. http://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/23