कृषि विज्ञान केंद्रों की पांच दशकों की गौरवशाली यात्रा

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लेखक

  • ऊधम सिंह गौतम भाकृअनुप, कृषि अनुसंधन भवन-1, पूसा नई दिल्ली-110012
  • रंजय कुमार सिंह भाकृअनुप, कृषि अनुसंधन भवन-1, पूसा नई दिल्ली-110012
  • अरविंद कुमार भाकृअनुप, कृषि अनुसंधन भवन-1, पूसा नई दिल्ली-110012

सार

कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) ने भारत के कृषि परिदृश्य में अग्रणी विस्तार प्रणाली के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये जिला-स्तरीय संस्थान, भारतीय कृषि के प्रक्षेप पथ को आकार देने, नवाचार को आगे बढ़ाने और वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीकों के साथ किसानों को सशक्त बनाने में सहायक रहे हैं। केवीके की यात्रा डा. मोहन सिंह मेहता समिति की रिपोर्ट की संस्तुतियों के पफलस्वरूप 21 मार्च, 1974 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) द्वारा पुड्डुचेरी (पूर्व में पांडिचेरी) में पहले केवीके की स्थापना के साथ शुरू हुई। तब से, केवीके ने देशभर में कृषि पक्तियों को बदलने और नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। योजना आयोग ने देश में अधिक केवीके स्थापित करने की विभिन्न क्षेत्रों से आ रही लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान 44 नए केवीके स्थापित करने की भाकृअनुप की योजना को अनुमति दी। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय कृषि आयोग (वर्ष 1976) ने ‘अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार’ पर अपनी रिपोर्ट में संस्तुति की कि प्रत्येक जिले के लिए एक केवीके और अंततः प्रत्येक जिले के लिए तीन केवीके स्थापित करने की योजना होनी चाहिए। 

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प्रकाशित

2024-04-09