स्थानीय संसाधन आधारित जैविक खेती से बढ़ाएं आमदनी
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भारत में प्रकृति आधारित कृषि का प्रचलन आदि काल से रहा है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से विभिन्न फसलों की सफलतापूर्वक खेती की जाती थी। कृषि के वर्तमान सघन निवेश आधारित नवीन वैज्ञानिक स्वरूप के विकास के साथ-साथ देश की प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित परंपरागत कृषि धीरे-धीरे हाशिये पर पहुंच गयी है। खाद्य पदार्थों की घटती गुणवत्ता और कृषि रसायनीकरण से सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण जैविक खेती आज एक वैकल्पिक प्रणाली के रूप में उभरी है। जैविक कृषि, भारतीय कृषक समुदाय, विशेष रूप से, अनुसूचित जनजातियों के सबसे कमजोर वर्ग के लिए एक ऋण मुक्त एवं लाभदायक आजीविका विकल्प है।
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