महिला स्वयं सहायता समूह की समृद्धि में सब्जी उत्पादन की भूमिका

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लेखक

  • हरप्रिया नायक भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • एस. सिंह भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • एस. बेहरा भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • पी.आर. साहू भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • बी.के. बांजा भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • पी.के. तिवारी भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)
  • पी.के. साहू भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुबनेश्वर (ओडिशा)

सार

बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा हेतु गुणवत्तापूर्ण सब्जियों की बढ़ती मांग के कारण, खोर्धा जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए आय सृजन हेतु सब्जियों की खेती एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरी है। कृषि विज्ञान केन्द्र-खोर्धा, भाकृअनुप-सीफा, भुबनेश्वर ने अनुसूचित जाति की महिला एसएचजी को जैविक पत्ति से सब्जियों की खेती के लिए तकनीकी रूप से सशक्त बनाया। इससे इन समूहों ने अच्छी-खासी आजीविका अर्जित की है। इस हस्तक्षेप के दौरान, तीन महिला स्वयं सहायता समूहों ने सक्रिय रूप से सब्जियों की खेती को अपनाया और उन्होंने 2 एकड़ भूमि के क्षेत्रा में बेबीकाॅर्न, भिंडी और खीरे की खेती से वर्ष 2023 (रबी सीजन) के दौरान 1,76,060 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त किया। इस प्रयास ने जिले की अनुसूचित जाति की अन्य कृषक महिलाओं को भी आर्थिक रूप से स्वतंत्रा होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

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प्रकाशित

2024-04-09