आदिवासी उत्थान के लिए कृषि प्रौद्योगिकियां

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लेखक

  • बागीश कुमार भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)
  • एम. थोइथोई देवी भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)
  • राजेश कुमार भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)
  • पूर्णिमा सैकिया भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)
  • जुगब्रत सर्मा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)
  • जी. कादिरवेल भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, अंचल-6, गुवाहाटी (असोम)

सार

गांव के अंतिम किसान द्वारा प्रौद्योगिकी को अपनाना, तकनीक विकास प्रक्रिया की परिणति है। सामान्य तौर पर कृषि विज्ञान केन्द्र और विशेष रूप से उत्तर-पूर्व के केवीक
अंतिम संपर्क के लिए मशाल वाहक का कार्य करते हैं। ये खेतों पर परीक्षण (ओएफटी), प्रथम पंक्ति प्रदर्शन (एफएलडी) और क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों तक उनकी
स्थायी आजीविका के लिए प्रौद्योगिकियों को पहुंचाते हैं। उत्तर-पूर्व के आदिवासी किसान केवीके का लाभ उठा रहे हैं और अपनी बेहतरी के लिए प्रौद्योगिकियों को अपना रहे हैं।

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प्रकाशित

2024-04-09