सुदूर क्षेत्रों में कृषि तकनीक पहुंचाते कृषि विज्ञान केन्द्र

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लेखक

  • बी.एल. जांगिड़ भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रा-II, जोधपुर-342005, राजस्थान
  • पी.पी. रोहिल्ला भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रा-II, जोधपुर-342005, राजस्थान
  • जे.पी. मिश्रा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रा-II, जोधपुर-342005, राजस्थान

सार

यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया गया है कि पर्याप्त ध्यान देने के बावजूद, देश में जनजातीय क्षेत्रा और जनजातीय लोग विकास में दूसरों से कापफी पीछे हैं। ये लोग समाज के सबसे कमजोर और सबसे शोषित वर्ग में से एक बने हुए हैं। आजादी से पहले और बाद में, विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के हितों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए संविधान में विशेष प्रावधानों के संदर्भ में, विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम तैयार किए गए थे। पिछड़ा वर्ग क्षेत्रा की रणनीति से लेकर पांचवीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत तक विशेष बहुउद्देशीय जनजातीय (एसएमपीटी) और जनजातीय विकास (टीडी) ब्लाॅक जैसे क्षेत्रा विशिष्ट दृष्टिकोण के साथ विकास के सामान्य क्षेत्रों से लाभ के प्रवाह पर निर्भर रहते हुए अब जनजातीय उपयोजना दृष्टिकोण तक पहुंच गया है।

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प्रकाशित

2024-04-09