सल्फर से बढ़ाएं तिलहनी फसलों का उत्पादन

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लेखक

  • नेहा चैहान चैधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)
  • प्रदीप कुमार चैधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)
  • नरेंद्र कुमार संख्यान चैधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)
  • पंकज सूद चैधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)
  • समीर कुमार चैधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)

सार

तिलहनी फसलें भारतीय आहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भारत में सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, तिल आदि मुख्य तिलहनी फसलें हैं तथा इसका उत्पादन देश में लगभग 37 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। इन फसलों के लिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग आवश्यक है। इनमें नाइट्रोजन, फाॅस्पफोरस, पोटाश, सल्पफर, जिंक व बोराॅन तत्व अति आवश्यक हैं। तिलहन को फसलों के उत्पादन के लिए सल्पफर एक अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। यह 0.06 प्रतिशत की औसत सांद्रता के साथ पृथ्वी की सतह में 13वां सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। यह प्रोटीन, तेल और विटामिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।

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प्रकाशित

2024-04-09