संरक्षण कृषि से सतत कृषि विकास
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संरक्षण कृषि के अन्तर्गत नवोन्मेषी फसलचक्र अपनाकर फसलों को बिना जुताई या बहुत कम जुताई करके बोया जाता है। इसमें फसल अवशेषों को मृदा सतह पर बने रहने दिया जाता है। मृदा सतह पर फसल अवशेषों के बने रहने से वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से होने वाले जल के नुकसान को कम किया जा सकता है। मृदा के तापमान का अनुकूलन, खरपतवारों के जमाव में कमी एवं इस पक्ति को लगातार अपनाकर मृदा में जीवांश कार्बन की वृद्धिकी जा सकती है।
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