संरक्षण कृषि से सतत कृषि विकास

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लेखक

  • राघवेन्द्र सिंह कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली
  • एस.के. सिंह कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली
  • शान्तनु कुमार दुबे कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली
  • रंजय कुमार सिंह कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली
  • सीमा यादव कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली
  • यू.एस. गौतम कृषि विस्तार विभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली

सार

संरक्षण कृषि के अन्तर्गत नवोन्मेषी फसलचक्र अपनाकर फसलों को बिना जुताई या बहुत कम जुताई करके बोया जाता है। इसमें फसल अवशेषों को मृदा सतह पर बने रहने दिया जाता है। मृदा सतह पर फसल अवशेषों के बने रहने से वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से होने वाले जल के नुकसान को कम किया जा सकता है। मृदा के तापमान का अनुकूलन, खरपतवारों के जमाव में कमी एवं इस पक्ति को लगातार अपनाकर मृदा में जीवांश कार्बन की वृद्धिकी जा सकती है।

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प्रकाशित

2024-04-09