पोषण से भरपूर श्रीअन्न

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लेखक

  • आलोक कुमार सिंह आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
  • उज्ज्वल कुमार सिंह कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • आशुतोष सिंह रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश)
  • कुमार अंशुमन कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • कीर्ति सिंह रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश)

सार

श्रीअन्न को कल का मोटा अनाज और आज का पोषक अनाज कहा जाता है। इसके अलावा मिलेट्स या श्रीअन्न फसलों को भविष्य की पफसल माना जाता है। ये फसलें अधिकांश कीटों और रोगों से प्रतिरोधी होती हैं। एशिया और अप्रफीका के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के वातावरण के प्रति ये पफसलें अनुकूल हैं। श्रीअन्न छोटे बीज वाले अनाज होते हैं। आहार के रूप में सबसे महत्वपूर्ण श्रीअन्न ज्वार, बाजरा रागी, टेपफ मिलेट, चीना, कोदो, कंगनी, कुटकी और पफोनिओ हैं। दशकों की लापरवाही के बाद, अब पिफर से पोषक अनाज भारतीय अनाज में मजबूती से वापसी कर रहे हैं। श्रीअन्न उपज में भारत की विश्वभर में 40.62 प्रतिशत की हिस्सेदारी और वर्ष 2018-2019 के दौरान लगभग 10.91 मिलियन टन का उत्पादन में योगदान था। श्रीअन्न उत्पादन में भारत पहले स्थान पर है और चावल एवं दालों में दूसरे स्थान पर है। इनमें अधिकांश अनाज (चावल, गेहूं, मक्का) की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक विटामिन, फाइबर, प्रोटीन और खनिज (कैल्शियम और आयरन) होता है। पोषक तत्वों से भरपूर श्रीअन्न कुपोषण और चयापचय संबंधी विकारों को कम करने के लिए व्यवहार्य समाधान हैं। ये देश की पोषण और खाद्य सुरक्षा को बढ़ा सकते हैं।

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प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

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