कोदो अनाज है गुणों से भरपूर

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लेखक

  • दीपक प्रजापति बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • अमर सिंह गौड़ बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • जगन्नाथ पाठक बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • विकास कुमार बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • विवेक कुमार यादव बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)

सार

कोदो अनाज का वैज्ञानिक नाम पास्पलम स्कोर्बीकुलातम है। यह पोएसी परिवार का सदस्य है। यह एक जल्दी पकने वाली एवं गरीबों की पफसल मानी जाती है। इसकी खेती कम उर्वर मृदा में बिना खाद तथा पानी के भी की जा सकती है। कोदो आकार में छोटा होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसे भारत में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे हिन्दी में कोदो, कन्नड़ में हरिका, गुजराती में कोदरा, तेलुगू में अरिकेलू एरिका आदि। देश में विभिन्न प्रकार के खाद्य अनाजों की खेती की जा रही है। कृषि उत्पादन से संबंधित सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यहां मुख्य रूप से कृषक केवल दो फसल गेहूं और चावल पर विशेष ध्यान देते हैं, जबकि दूसरी फसलों श्रीअन्न जैसे-ज्वार, बाजरा, सांवां, कोदो आदि भी देश के खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन (शुष्क जलवायु) के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।

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प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

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