श्रीअन्न का बढ़ता योगदान

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लेखक

  • हिमांशु पाण्डेय डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • अजय कुमार साह डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • राहुल कुमार राॅय डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)
  • शालिनी पाण्डेय डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)

सार

श्रीअन्न, कुल खाद्य उत्पादन का लगभग एक चैथाई हिस्सा हैं। ये देश के अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में अहम् योगदान देते हैं। श्रीअन्न आज से नहीं, प्राचीनकाल से ही मानव आहार का अभिन्न अंग हैं। हालांकि हरित क्रांति काल के बाद से मानव समाज ने अपनी आहार प्रणाली में परिवर्तन ला दिया है। इसके फलस्वरूप इनका उपयोग कुछ हद तक कम हो गया है परंतु इनमें उपस्थित पोषक तत्वों की प्रचुरता और रोगरोधी क्षमताओं के कारण इन्हें आहार के रूप में ग्रहण करना मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

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