श्रीअन्न में पाए जाने वाले सूत्रकृमियों का प्रबंधन

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लेखक

  • शर्मिष्ठा ठाकुर चौधरी चरण सिहं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार-125004 (हरियाणा)
  • प्रियंका दुग्गल चौधरी चरण सिहं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार-125004 (हरियाणा)
  • सुमन सांजटा चौधरी चरण सिहं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार-125004 (हरियाणा)

सार

ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी और चीना, श्रीअन्न की विभिन्न किस्मों के रूप में आते हैं। यह अत्यधिक पौष्टिक और बहुमुखी अनाज फसलों का एक समूह है, जो सदियों से कई संस्कृतियों में ‘प्रमुख अनाज’ रहे हैं। अपने अनूठे स्वाद, उच्च पफाइबर सामग्री और कई स्वास्थ्य लाभों के साथ, श्रीअन्न दुनियाभर के कई देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इतने अध्कि महत्वपूर्ण होने के बावजूद इनके उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका प्रमुख कारण सूत्राकृमि का प्रकोप है। उपज की गुणवत्ता एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए इसकी रोकथाम करना आवश्यक है।

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प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

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