रागी में समेकित रोग प्रबंधन

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लेखक

  • संजीव कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • राकेश कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • आनंद कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर-813210 (बिहार)
  • हंसराज हंस भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना-800014 (बिहार)

सार

रागी, किसानों की आहार संबंधी आदतों एवं अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यूं तो रागी की फसल कई रोगों से प्रभावित होती है, परंतु इन सब में ब्लास्ट (झुलसा) रोग सबसे अधिक (28-90 प्रतिशत) हानि पहुंचाता है। इससे प्रति वर्ष उत्पादन में काफी कमी हो जाती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। रोगों का समुचित प्रबंधन करके इनसे होने वाली हानि को कम किया जा सकता है। भारत में रागी की मांग अचानक से बढ़ रही है। बाजार में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए किसान इसकी खेती करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इसकी कीमत भी काफी अच्छी मिल रही है। इसके साथ ही इसकी खेती करना ज्यादा कठिन भी नहीं है। यानी रागी की खेती कर किसान कम मेहनत में ही अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

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