प्राकृतिक खाद्य रंगों का उपयोग

278 / 208

लेखक

  • प्रियंका साकरे भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची (झारखंड)
  • नंदकिशोर ठोंबरे भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची (झारखंड)
  • अर्चना महापात्रा भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची (झारखंड)

सार

किसी भी खाद्य पदार्थ की प्रारंभिक स्वीकृति या अस्वीकृति को प्रभावित करने में रंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आहार को आकर्षक बनाने के अलावा रंग, खाद्य सुरक्षा और पोषण गुणवत्ता की दृष्टि से भी कम उपयोगी नहीं हैं। खाद्य रंग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैंः कृत्रिम रंग और प्राकृतिक रंग। कृत्रिम रंग अत्यधिक स्थिर, आकर्षक और कम लागत वाले होते हैं। इनका उपयोग मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की दृष्टिकोण से हानिकारक है। कृत्रिम रंगों के हानिकारक प्रभावों को देखते हुए पिछले कुछ समय में उपभोक्ताओं की रुचि प्राकृतिक रंगों की तरपफ बढ़ी है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2024-06-19

अंक

खंड

Articles