मौसम की समझ, मत्स्य पालन में सफलता की कुंजी

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लेखक

  • Ved Prakash ICAR Research Complex for Eastern Region, Patna
  • Kirti Saurabh ICAR Research Complex for Eastern Region, Patna
  • Rakesh Kumar ICAR, NRM Division, KAB-II, New Delhi
  • Arti Kumari ICAR Research Complex for Eastern Region, Patna

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जलवायु परिवर्तन##common.commaListSeparator## मत्स्य पालन##common.commaListSeparator## मौसम पूर्वानुमान##common.commaListSeparator## प्राकृतिक आपदाएं

सार

जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षापात, समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, मौसम के बदलाव, जल निकायों का अम्लीकरण, जैव विविधता और वन्यजीवन का नुकसान, प्राकृतिक आपदाओं जैसे सुखा, जंगलों में अचानक आग लगना, बीमारी का प्रकोप आदि से पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है । यह स्थलीय और जलीय दोनों पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसा माना जा रहा है, भविष्य में हवा के तापमान में वृद्धि से जल के भी तापमान में वृद्धि हो सकती है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य पालन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकता है । जलवायु परिवर्तन का मछली पालन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है, जिसमें पानी के तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और जल स्रोतों के सूखने जैसी समस्याएं शामिल हैं। इन समस्याओं के कारण मछलियों के प्रजनन, विकास और जीवन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । ऐसे में सटीक मौसम पूर्वानुमान मछली पालन के लिए एक महत्वपूर्ण सुचना साबित हो सकता है । सही समय पर मौसम की जानकारी मिलने से मछुआरे जलवायु आधारित जोखिमों से बच सकते हैं और मछली पालन के लिए बेहतर निर्णय ले सकते हैं । उदाहरण के लिए, यदि भारी वर्षा या बाढ़ की संभावना हो तो मछुआरे पहले से तैयारी कर सकते हैं, जिससे जलाशयों में मछलियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है ।

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  • ##submission.authorWithAffiliation##

    Land and Water Management, Sr. Scientist

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    Land and Water Management, Scientist

  • ##submission.authorWithAffiliation##

    NRM, Principle Scientist

  • ##submission.authorWithAffiliation##

    Land and water management, Scientist

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प्रकाशित

2026-03-20