आर्द्र क्षेत्रों में मात्स्यिकी संवर्द्धन
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बिहार के प्राकृतिक खुला जल मत्स्य संसाधन क्षेत्रा के अंतर्गत 9000 हैक्टर से अधिक मन (गोखुर झीलों) और 0.1 मिलियन हैक्टर चैर ;बाढ़कृत मैदानद्ध आते हैं। ये इन जल संसाधनों पर निर्भर हजारों मछुआरों को आजीविका और पोषण सुरक्षा प्रदान करते हैं। इनमें से अधिकांश मन और चैर निचले गांगेय मैदान के कोसी-गंडक उप बेसिन में स्थित हैं, जिनमें प्रत्येक वर्ष बाढ़ आ जाती है। यह बाढ़ मत्स्य संसाधन और उनपर निर्भर मछुआरों के लिए वरदान और शाप दोनों मानी जाती है। उत्पादकता की स्थिति के आंकलन से इन संसाधनों से वर्तमान उपज (70-180 कि.ग्रा./हैक्टर/वर्ष) और संभावित उपज (350-800 कि.ग्रा./हैक्टर/वर्ष) के बीच व्यापक अंतर देखा गया है। दोनों उपज के बीच इस अंतर के महत्वपूर्ण विश्लेषणों से पता चला है कि प्रतिवर्ष बाढ़, बहुहित धारकों का नियंत्राण, संस्थागत व्यवस्था का मंद होना, बड़े परभक्षी प्रजातियों की उपस्थिति, मत्स्यपालन के संबंध में अपर्याप्त ज्ञान, कौशल क्षमता में कमी कुछ ऐसी अन्य कमियां और खतरे हैं, जिनसे इन संसाधनों की उत्पादन क्षमता का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं होता है।
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