प्राकृतिक खेती : सतत कृषि का आधार
131 / 186सार
प्राकृतिक खेती एक समन्वित एवं रसायन-मुक्त कृषि प्रणाली है, जो परंपरागत कृषि ज्ञान और पारिस्थितिकीय सिद्धांतों पर आधारित है। यह पद्धति फसलों, वृक्षों और पशुधन को कार्यात्मक जैव विविधता के साथ एकीकृत कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और जल संरक्षण सुनिश्चित करने में सहायक है। प्राकृतिक खेती को एक लागत-प्रभावी एवं दीर्घकालिक रूप से व्यवहार्य विकल्प माना जाता है, जो किसानों की बाहरी रासायनिक निविष्ट पर निर्भरता घटाने के साथ ग्रामीण आजीविका में योगदान देती है। इसका मूल दर्शन ‘प्रकृति के साथ सामंजस्य’ है, जो खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन, ग्रामीण पुनरुत्थान और सतत विकास को सुदृढ़ करता है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।