फरवरी के मुख्य कृषि कार्य
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फरवरी माह बसंत पंचमी का त्यौहार लेकर आता है। चारों तरपफ पीले-पीले पफूल खिले होते हैं तथा मौसम में धीरे-धीरे ठंड कम होने लगती है। त्वरित गति से बढ़ती जनसंख्या, अनियोजित शहरीकरण व औद्योगिकीकरण और भूमि, जल तथा वायु आदि प्राकृतिक संसाधनों का अनियन्त्रिात दोहन, जलवायु में अस्वाभाविक बदलाव जैसी गम्भीर समस्याओं से घिरे देश के कृषि क्षेत्रा को नये आयाम देने की आवश्यकता है। किसानों को ऐसी तकनीकियों तथा पफसल पक्तियों को अपनाने की आवश्यकता है, जिनसे प्रयोगशालाओं में तैयार की गयी तकनीकियां किसानों के खेतों से होते हुये बाजार में कड़ी टक्कर दें। पर्यावरण संतुलन भी बना रहे और कृषि पर निर्भरता कम करके कृषि आधारित व्यवसायों व उद्योगों को बढ़ावा मिले। इससे ग्रामीण अंचल न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था से मजबूत होकर स्वावलम्बी व खुशहाल भी बनेगा।
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