ोह्पेरपह कग ोोोह सैलसेले कोर ैकचल त्ददगर
106 / 130##semicolon##
Precision farmingसार
वर्तमान समय में कृषि उपकरणों में रिमोट सेंसिंग, जीपीएस, जीआईएस और डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों को शामिल किया जा रहा है, जिससे खेती अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बन रही है। विश्वभर के किसान अपनी खेती की परिशुद्धता बढ़ाने के लिए नई-नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। प्रीसिजन फार्मिंग कम संसाधनों का उपयोग करते हुए उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने की एक प्रभावी कृषि पद्धति है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है, बल्कि वैज्ञानिकों तथा कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिलता है। संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से कृषि को अधिक सुदृढ़, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुरूप बनाया जा सकता है।मृदा, मौसम, जलवायु, पौधों और जल जैसे पर्यावरणीय घटक स्थान-स्थान पर भिन्न होते हैं। ऐसे में फसल वृद्धि और कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए स्थानविशेष के अनुसार तकनीकों का उपयोग आवश्यक हो जाता है। प्रीसिजन फार्मिंग इसी आवश्यकता को पूरा करती है। इसके परिणामस्वरूप किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। बढ़ती आबादी के समक्ष खाद्य उत्पादन की आवश्यकता को पूरा करने में प्रीसिजन फार्मिंग अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। साथ ही यह किसानों को टिकाऊ कृषि अपनाने, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने तथा उच्च उत्पादकता के साथ आर्थिक लाभ प्राप्त करने में सहायता प्रदान करती है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।