समन्वित कृषि प्रणालीः छोटे किसानों की उन्नत आजीविका
82 / 47सार
समन्वित कृषि प्रणाली से किसानों, खासतौर पर छोटे काश्तकारों को अपने घर और बाजार के लिए कई तरह की वस्तुओं केउत्पादन का पर्याप्त अवसर प्राप्त होता है। इसके साथ ही साथ कृषि के क्षेत्रा में रोजगार के अवसर बढ़ाने, परिवार के लिए सन्तुलित पौष्टिक आहार जुटाने, वर्षभर आमदनी एवं रोजगार का प्रबंधन करने तथा मौसम और बाजार संबंधी जोखिमों को कम करने में भी मदद मिलती है। इससे खेती में काम आने वाली वस्तुओं के लिए किसानों की बाजार पर निर्भरता भी कम होती है। वहीं वर्तमान में खेती में लागत ज्यादा एवं पैदावार मे बढ़ोतरी न होने से किसानों की शु( आय मे निरंतर कमी होती जा रही है। मृदा का स्वास्थ्य भी दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। एक ओर जहां छोटे स्तर पर एवं सीमान्त किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं प्राकृतिक संसाधनों की कमी होती जा रही है। ऐसी स्थिति में सीमान्त एवं छोटे स्तर पर खेती को किस तरह लाभकारी व्यवसाय बनाकर किसान परिवार की जीविका सुनिश्चित की जाए एवं उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया जाए, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण चुनौती है। इसी शृंखला में भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा उत्तर भारतीय परिस्थितियों में रहने वाले छोटे एवं सीमान्त किसानों के लिए 1.0 हैक्टर सिंचित भूमि पर एक समन्वित कृषि प्रणाली माॅडल विकसित किया गया है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।