समन्वित कृषि प्रणालीः छोटे किसानों की उन्नत आजीविका

82 / 47

लेखक

  • राजीव कुमार सिंह सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • कपिला शेखावत सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • प्रवीण कुमार उपाध्याय सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • संजय सिंह राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • विशाल त्यागी सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012

सार

 समन्वित कृषि प्रणाली से किसानों, खासतौर पर छोटे काश्तकारों को अपने घर और बाजार के लिए कई तरह की वस्तुओं केउत्पादन का पर्याप्त अवसर प्राप्त होता है। इसके साथ ही साथ कृषि के क्षेत्रा में रोजगार के अवसर बढ़ाने, परिवार के लिए सन्तुलित पौष्टिक आहार जुटाने, वर्षभर आमदनी एवं रोजगार का प्रबंधन करने तथा मौसम और बाजार संबंधी जोखिमों को कम करने में भी मदद मिलती है। इससे खेती में काम आने वाली वस्तुओं के लिए किसानों की बाजार पर निर्भरता भी कम होती है। वहीं वर्तमान में खेती में लागत ज्यादा एवं पैदावार मे बढ़ोतरी न होने से किसानों की शु( आय मे निरंतर कमी होती जा रही है। मृदा का स्वास्थ्य भी दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। एक ओर जहां छोटे स्तर पर एवं सीमान्त किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं प्राकृतिक संसाधनों की कमी होती जा रही है। ऐसी स्थिति में सीमान्त एवं छोटे स्तर पर खेती को किस तरह लाभकारी व्यवसाय बनाकर किसान परिवार की जीविका सुनिश्चित की जाए एवं उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया जाए, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण चुनौती है। इसी शृंखला में भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा उत्तर भारतीय परिस्थितियों में रहने वाले छोटे एवं सीमान्त किसानों के लिए 1.0 हैक्टर सिंचित भूमि पर एक समन्वित कृषि प्रणाली माॅडल विकसित किया गया है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-03-20