दलहन उत्पादकता वृद्धि से आत्मनिर्भरता

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लेखक

  • नरेंद्र कुमार भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर-208024 उत्तर प्रदेश
  • मोहम्मद हाशिम भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर-208024 उत्तर प्रदेश
  • आदर्श कुमार भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर-208024 (उत्तर प्रदेश)
  • मनमोहन देव भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर-208024 उत्तर प्रदेश
  • सी.पी. नाथ भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर-208024 उत्तर प्रदेश

सार

भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है और यहां खाद्य एवं पोषण सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है। बीते दशकों में देश ने अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, जिससे कैलोरी उपलब्धता बढ़ी है। किंतु शरीर के विकास, प्रतिरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन की उपलब्धता अति आवश्यक है। प्रोटीन सुरक्षा केवल प्रोटीन की मात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके स्रोत, गुणवत्ता, पोषण संतुलन और सबके लिए समान पहुंच को भी समाहित करता है। देश में प्रोटीन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दलहन एक प्रमुख खाद्य समूह है। यह न केवल प्रोटीन उपलब्ध करवाता है, बल्कि पोषण सुरक्षा, मृदा की उर्वरता, जलवायु सहनशीलता और किसानों की आय वृ(ि में भी योगदान देता है। दलहन केवल प्रोटीन ही नहीं, बल्कि रेशा ; (फाइबरद्), प्रतिरोधी स्टार्च, सूक्ष्म पोषक तत्व (आयरन, जिंक, फोलेट) तथा हृदय और चयापचय स्वास्थ्य से जुड़े जैव-सक्रिय यौगिक भी प्रदान करते हैं, जो इन्हें स्वस्थ आहार और टिकाऊ कृषि-पर्यावरणीय प्रणालियों की धुरी बनाते हैं।

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प्रकाशित

2026-03-20