शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों हेतु एग्रीवोल्टाइक प्रणाली

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लेखक

  • वेद प्रकाश Sr. Scientist, ICAR–Integrated Farming Systems Research Institute, Modipuram, Meerut, India
  • मोहम्मद आरिफ Scientist, ICAR–Integrated Farming Systems Research Institute, Modipuram, Meerut, India
  • अमृत लाल मीणा Sr. Scientist, ICAR–Integrated Farming Systems Research Institute, Modipuram, Meerut, India
  • जगन सिंह गोरा Sr. Scientist, ICAR–Integrated Farming Systems Research Institute, Modipuram, Meerut, India
  • राघवेन्द्र सिंह Ps. Scientist, ICAR–Integrated Farming Systems Research Institute, Modipuram, Meerut, India

सार

भारत के शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र कृषि के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं। यहां अल्प वर्षा, उच्च तापमान, सीमित जल संसाधन और कम उपजाऊ भूमि के कारण किसानों को फसल उत्पादन में अस्थिरता और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान हेतु एग्रीवोल्टाइक प्रणाली एक उभरती हुई तकनीक के रूप में सामने आई है, जो कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एकीकृत करती है। इस प्रणाली में कृषि भूमि पर सौर पैनलों को इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि फसलें और सौर ऊर्जा दोनों एक साथ उत्पादित हो सकें। सौर पैनलों की छाया से भूमि की नमी बनी रहती है और वाष्पीकरण कम होता है, जिससे जल संरक्षण होता है। किसान अपनी आवश्यकताओं के लिए बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। एग्रीवोल्टाइक प्रणाली से भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ती है, सूक्ष्म जलवायु में सुधार होता है, और किसानों को दोहरा लाभ मिलता है। यह टिकाऊ कृषि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास को सशक्त करने वाली एक अभिनव और प्रभावशाली तकनीक है।

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प्रकाशित

2026-05-04

अंक

खंड

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