मछली के साथ सिंघाड़े की समन्वित खेती
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देश की बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण जल और भूमि जैसे कृषि संसाधन लगातार सीमित होते जा रहे हैं और प्रदूषण की चुनौती भी बढ़ रही है। देश की लगभग आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही है, जिन्हें प्रोटीनयुक्त पोषक आहार के साथ-साथ रोजगार के बेहतर अवसरों की भी आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसानों के पास भूमि कम होने और छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित होने के कारण एकल कृषि प्रणाली अब आर्थिक दृष्टि से लाभकारी नहीं रही। इस
स्थिति में ऐसी नीतियों और तकनीकों की आवश्यकता है, जो कम पूंजी निवेश के साथ अधिक उत्पादन और अधिक रोजगार सृजन की क्षमता प्रदान करें तथा उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखें। इस दिशा में मत्स्य पालन के साथ सिंघाड़े की समन्वित खेती एक उपयोगी और व्यावहारिक माॅडल साबित हो सकती है। यह प्रणाली सीमित जलभूमि संसाधनों का कुशल उपयोग कर किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर पोषण उपलब्धता
और पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो सकती है।
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