अंकुरण सुधार हेतु बीज गोलीकरण तकनीक
34 / 74सार
शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में बीज गोलीकरण एक प्रभावी, सस्ती और टिकाऊ तकनीक है। यह बीजों की अंकुरण दर, पौधों की प्रारंभिक वृद्धि और फसल के जीवित रहने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। यह तकनीक बीज को नमी, पोषक तत्वों और कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे संसाधनांे का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की स्थितियों में बीज गोलीकरण किसानों को अधिक लचीली, उत्पादक और स्थायी कृषि प्रणाली अपनाने में सहायक सिद्ध होता है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।