अंकुरण सुधार हेतु बीज गोलीकरण तकनीक

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लेखक

  • महिपाल चैधरी भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, बल्लारी-583104
  • अनुषा एम.एन. भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, बल्लारी-583104
  • बी. कृष्णा राव भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, बल्लारी-583104
  • रवि के.एन. भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, बल्लारी-583104
  • एम. मधु भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून-248195

सार

शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में बीज गोलीकरण एक प्रभावी, सस्ती और टिकाऊ तकनीक है। यह बीजों की अंकुरण दर, पौधों की प्रारंभिक वृद्धि और फसल के जीवित रहने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। यह तकनीक बीज को नमी, पोषक तत्वों और कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे संसाधनांे का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की स्थितियों में बीज गोलीकरण किसानों को अधिक लचीली, उत्पादक और स्थायी कृषि प्रणाली अपनाने में सहायक सिद्ध होता है। 

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प्रकाशित

2026-01-03