पर्वतीय क्षेत्रों में बीज संरक्षण एवं सामुदायिक बीज बैंक सुदृढ़ीकरण
27 / 49सार
उत्तर-पश्चिमी हिमालयी राज्य उत्तराखंड पारंपरिक पफसल विविधता का भंडार है, जो यहां के पर्वतीय क्षेत्रों में आहार विविधता, पोषण और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित
करता है। पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक और जलवायुवीय परिस्थितियां इस क्षेत्र की पारंपरिक पफसलों को उत्कृष्ट गुणवत्ता प्रदान करती हैं, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर
मूल्य प्राप्त होता है। वर्तमान में इस पारंपरिक कृषि जैव विविधता का तेजी से क्षरण हो रहा है। कृषक समुदाय इसकी पूर्ण क्षमताओं से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं। इस
स्थिति को देखते हुए, पारंपरिक पफसलों की कृषक प्रजातियों का राष्ट्रीय स्तर पर पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा संरक्षण एवं स्थानीय
बीज बैंकों के माध्यम से स्थानीय बीज प्रणालियों का सशक्तिकरण, मूल्य शृंखला तथा प्रसंस्करण के विकास के प्रयास किए गए। ये प्रयास उत्तराखंड के अल्मोड़ा और टिहरी
जिलों के 17 गांवों में कृषक सहभागिता के माध्यम से क्रियान्वित किए गए। अनुसंधान संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और ग्रामीण समुदायों के समन्वित प्रयासों से इन लक्षित
क्षेत्रों में न केवल पारंपरिक किस्मों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ी, बल्कि बीज बैंकों के माध्यम से पारंपरिक फसलों की गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता में सुधार
तथा इनके प्रसंस्करित उत्पादों के माध्यम से विपणन एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। यह प्रयास पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक फसल किस्मों के संरक्षण, संवर्धन और
व्यावसायीकरण का एक सफल माॅडल प्रस्तुत करता है, जिसे व्यापक स्तर पर अपनाकर किसानों की आय, पोषण सुरक्षा एवं कृषक अधिकार संरक्षण को और अधिक सुदृढ़
किया जा सकता है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।