कार्बन खेती जलवायु स्मार्ट कृषि का सशक्त माॅडल

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लेखक

  • आनन्द प्रसाद राकेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी, पूर्वी चंपारण
  • संतोष कुमार सिंह पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी, पूर्वी चंपारण
  • आर.के. झा पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी, पूर्वी चंपारण
  • शिवनाथ सुमन स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय, डा. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार)

सार

कार्बन खेती एक नवाचार आधारित कृषि प्रणाली है, जिसका उद्देश्य मृदा, पौधों और अन्य जैविक अवयवों में कार्बन का संचयन बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। आधुनिक कृषि ने उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है, किंतु इसके साथ मृदा क्षरण, पोषक तत्वों का असंतुलन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं। इन चुनौतियों से निपटने हेतु कार्बन खेती एक प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। इस प्रणाली में कृषि वानिकी, संरक्षण कृषि, पफसलचक्रण, जैविक खेती, पशुधन प्रबंधन, बायोचार उत्पादन तथा आर्द्रभूमि पुनस्र्थापन जैसी तकनीकों का समावेश किया जाता है, जो मृदा स्वास्थ्य, जैव विविधता, जल संरक्षण और कार्बन संचयन को बढ़ावा देती हैं। ‘4 पर 1000’ पहल के अनुसार, मृदा कार्बन में वार्षिक 0.4 प्रतिशत की वृद्धि वैश्विक कार्बन डाइआक्साइड की वृद्धि की भरपाई करने में सहायक हो सकती है। अतः कार्बन खेती न केवल कृषि की उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि का साधन है, बल्कि यह जलवायु-स्मार्ट कृषि का एक सशक्त और टिकाऊ माॅडल भी है, जो पर्यावरणीय संतुलन और खाद्य सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करता है।

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प्रकाशित

2026-03-20