बहुपयोगी अजोला का एकीकृत उत्पादन

51 / 78

लेखक

  • नूपुर शर्मा विषय विशेषज्ञ कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान)
  • जगदीश प्रसाद तेतरवाल प्राध्यापक, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान)
  • वर्षा गुप्ता सहायक प्राध्यापक, सस्य विज्ञान कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान)
  • बी.एल. मीणा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (राजस्थान)

सार

अजोला एक तैरने वाली जलीय फर्न है, जो नील-हरित शैवाल के साथ सहजीवी संबंध स्थापित कर वायुमंडलीय नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकरण करती है। तीव्र वृद्धि, उच्च नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता तथा शीघ्र अपघटन गुणों के कारण अजोला जैव उर्वरक, हरी खाद एवं पशु आहार के रूप में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में अजोला पफसलों को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन उपलब्ध कर मृदा की उर्वराशक्ति में सुधार, पफसल उत्पादकता में वृद्धि तथा पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होती है। धान की खेती में अजोला का उपयोग दोहरी पफसल, हरी खाद एवं खरपतवार नियंत्राण के रूप में प्रभावी पाया गया है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इसके अतिरिक्त, अजोला प्रोटीन, खनिज तत्वों एवं आवश्यक अमीनो अम्ल से समृ( होने के कारण पशुपालन एवं मत्स्य पालन में भी लाभकारी सिद्ध होती है। इस प्रकार अजोला आधारित कृषि प्रणाली टिकाऊ, कम लागत वाली एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रणाली के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-03-20