त्वरित कंपोस्टिंग तकनीक से फसल अवशेषों का पुनर्चक्रण

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लेखक

  • अनुप्रिया यादव सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि रूप से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव संस्थान, कुशमौर, मऊ-275103 (उत्तर प्रदेश)
  • वेल्लाइचामी मागेश्वरन सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि रूप से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव संस्थान, कुशमौर, मऊ-275103 (उत्तर प्रदेश)

सार

कृषि भारत की रीढ़ है और किसानों की आजीविका का मुख्य साधन भी है। समय के साथ आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग बढ़ा है, जिससे मृदा की उर्वरता में गिरावट आई है तथा उत्पादन लागत में भी वृद्धि हुई है। इस समस्या का प्रभावी समाधान जैविक खेती में निहित है, जिसका सबसे महत्वपूर्ण घटक कम्पोस्ट खाद है। कम्पोस्ट एक प्राकृतिक जैविक खाद है, जिसे सूक्ष्मजीवों की सहायता से जैविक अपशिष्टों का अपघटन कर तैयार किया जाता है। भाकृअनुप-एनबीएआईएम द्वारा विकसित त्वरित कम्पोस्टिंग तकनीक के अंतर्गत ‘कुश बायो फास्ट’ (तरल जैव संवर्धक) का उपयोग कर फसल अवशेषों जैसे धान की पराली, भूसा, सरसों के डंठल, वृक्षों की पत्तियां आदि से मात्रा 60 दिनों में गुणवत्तायुक्त कम्पोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। कम्पोस्ट खाद न केवल मृदा की उर्वराशक्ति एवं जैविक कार्बन को बढ़ाती है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक सुरक्षित और सतत उपाय है।

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प्रकाशित

2026-03-20