धान की फसल में कम्पोस्ट टी का प्रयोग

43 / 75

लेखक

  • सौरव चैरसिया सस्य विज्ञान विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या-224229 (उत्तर प्रदेश)
  • श्रद्धा यादव सस्य विज्ञान विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या-224229 (उत्तर प्रदेश)
  • ए.के. सिंह सस्य विज्ञान विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या-224229

सार

धान (ओराइजा सैटिवा एल) विश्व की सर्वाधिक उपजाऊ और उपभोग की जाने वाली अनाज फसल है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में उत्पादन बढ़ाने हेतु रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है, जिसके कारण मृदा स्वास्थ्य, जल गुणवत्ता और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव  पड़ रहा है। इस प्ररिप्रेक्ष्य में कम्पोस्ट टी एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप से उभरकर सामने आया है। कम्पोस्ट टी, उच्च गुणवत्ता वाले कम्पोस्ट से तैयार घोल है, जिसमें पोषण तत्वों के साथ-साथ लाभकारी सूक्ष्मजीव और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। अनेक शोध अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि कम्पोस्ट टी के प्रयोग से धान की वृद्धि दर, उपज, गुणवत्ता तथा मृदा स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होता है। यह लेख कम्पोस्ट टी की तैयारी की विधियां, इसके पोषक एवं सूक्ष्मजीवी गुणों तथा धान उत्पादन पर इसके प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-03-20