अरहर उत्पादन की उन्नत विधि
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’हरित क्रान्ति’ के कारण हम खाद्यान्न पफसलों में आत्मनिर्भर होने के साथ ही निर्यात करने की स्थिति में भी आ गए हैं। इसका एक दुष्परिणाम यह भी हुआ है कि दलहन उत्पादन में हम पिछड़ गए हैं। गेहूं-धान की अपेक्षा दलहनी पफसलों से सौतेले व्यवहार एवं कुछ तकनीकी कारणों से देश में दाल की उपलब्धता विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक (30 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) से काफी कम है।
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