मकई रेशम का प्रसंस्करण

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लेखक

  • आकांक्षा सिंह कृषि विज्ञान केन्द्र, मऊ, बस्ती, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या

सार

आज की बदलती जीवनशैली में कृषि अपशिष्ट एवं उप उत्पादों को कार्यात्मक यौगिकों के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। कृषि प्रसंस्करण उद्योगों से बड़ी मात्रा में उप उत्पाद उत्पन्न होते हैं, जिन्हें प्रायः अपशिष्ट मानकर त्याग दिया जाता है। यह न केवल संसाधनों का अपव्यय है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण का भी एक प्रमुख कारण बनता है। इसी संदर्भ में मक्का रेशम (कॉर्न सिल्क) एक ऐसा उप उत्पाद है, जिसमें पोषक एवं स्वास्थ्यवर्धक गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सामान्यतः मक्का के विभिन्न भाग जैसे-अनाज, पत्तियां, डंठल तथा पुष्पक्रम का उपयोग चारे कच्चे माल एवं घरलेू उपयोगों में किया जाता है जबकि मक्का रेशम को अक्सर बेकार समझकर फेक दिया जाता है। विशेष रूप से बेबीकॉर्न उत्पादन के दौरान बड़ी मात्रा में ताजा मक्का रेशम निकलता है, जिसे प्रायः अपशिष्ट के रूप में त्याग दिया जाता है। वास्तव में मक्का रेशम पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसका उपयोग कार्यात्मक खाद्य उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है यदि इसका व्यवस्थित उपयागे किया जाए, तो यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक नया सा्र ते बन सकता है। साथ ही, इसे जलाने या नष्ट करने के बजाय उपयोग में लाने से पर्यावरणीय क्षरण को भी रोका जा सकता है। इस प्रकार मक्का रेशम का उपयोग एक टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य सुधार में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।

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प्रकाशित

2026-05-04

अंक

खंड

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