सोयाबीन उत्पादन में ऊर्जा खपत का आंकलन

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लेखक

  • मनीष कुमार भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • प्रकाश चन्द्र जेना भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • हर्षा वाकुडकर भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • संदीप गांगिल भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • विनोद कुमार भार्गव भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)

सार

मध्य प्रदेश के विंध्य पठार कृषि जलवायु क्षेत्रा में विभिन्न ऊर्जा आदानों के आधार पर सोयाबीन पफसल उत्पादन प्रणाली में ऊर्जा खपत व औसत उपज की गणना की गयी। परिणामों के आधार पर सोयाबीन उत्पादन के लिए औसत उपज और ऊर्जा खपत क्रमशः 950 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और 10875.95 मेगाजूल प्रति हैक्टर प्राप्त हुई। इसके अलावा, कुल ऊर्जा खपत में रसायन उर्वरक अनुप्रयोग का सबसे अधिक हिस्सा (47 प्रतिशत) प्राप्त हुआ। इसके बाद बीज की बुआई में (25 प्रतिशत) और पफसल की कटाई एवं गहाई में (15 प्रतिशत) व खेत की तैयारी में (13 प्रतिशत) ऊर्जा खपत प्राप्त हुई। इसके साथ ही साथ शुद्ध ऊर्जा, ऊर्जा उत्पादकता, विशिष्ट-ऊर्जा एवं ऊर्जा अनुपात क्रमशः 19321.77 मेगाजूल प्रति हैक्टर, 0.09 कि.ग्रा. प्रति मेगाजूल, 21.24 मेगाजूल प्रति कि.ग्रा. एवं 2.98 प्राप्त हुआ। रसायन उर्वरक अनुप्रयोग, बीज की बुआई एवं खेत की तैयारी में क्रमशः रसायन एवं रासायनिक उर्वरक का अनुशंसित प्रयोग तथा बुआई में बीज की किस्म के अनुसार निर्धारित बीज-दर एवं संरक्षण कृषि आधारित बहुद्देशीय कृषि यंत्रों का प्रयोग कर ऊर्जा खपत में बचत की जा सकती है।

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प्रकाशित

2023-03-17