भेड़ और बकरियों के उत्पादों का मूल्यसंवर्धन

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लेखक

  • बाबू लाल जाँगिड़ भा कृ अनु प -कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र -द्वितीय, जोधपुर 
  • प्रेम पाल रोहिल्ला भा कृ अनु प -कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र -द्वितीय, जोधपुर 

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शुष्क क्षेत्र, भेड़ और बकरियों, मूल्यसंवर्धन, प्रसंस्करण, राजस्थान

सार

मांस की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हमें भेड़ और बकरियों की उत्पादकता बढ़ाने पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के छोटे पशुपालकों की पूर्ण क्षमता का लाभ उठाने के लिए, व्यावसायिक उत्पादन हेतु उन्हें सघन और अर्ध-सघन प्रणालियों के तहत पालना अत्यंत आवश्यक है ताकि उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके। भेड़ और बकरियों को जीवित भार के आधार पर बेचा जाना चाहिए और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना होगा। मांस उद्योग द्वारा समर्थित संविदा खेती या ग्रामीण मांस उत्पादन केंद्रों को बढ़ावा देना भी उत्पादकता में सुधार, उपभोक्ताओं को स्वच्छ मांस की उपलब्धता और पशुपालकों को अधिक लाभ दिलाने में सहायक हो सकता है। अतः, इन पशुपालकों के मांस के उपयोग के लिए प्रसंस्कृत एवं मूल्यसंवर्धित उत्पादों के विकास हेतु उपयुक्त रणनीतियाँ समय की मांग हैं। प्रसंस्करण क्षेत्र भेड़ और बकरी उत्पादन क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग और विपणन क्षमता में वृद्धि होगी। मांस उत्पादन के लिए भेड़-बकरियों के पालन-पोषण हेतु पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों का एक पैकेज उपलब्ध है जिसे लघु और व्यावसायिक उत्पादन प्रणालियों में अपनाया जा सकता है। राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में इन कम लागत वाली तकनीकों को अपनाकर छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित करने के लिए सरकार, गैर सरकारी संगठनों और सहकारी क्षेत्र द्वारा समन्वित प्रणालीगत प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि उनके साथ उत्पादन आधार को बढ़ावा दिया जा सके।

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    भा कृ अनु प -कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र -द्वितीय, जोधपुर 

    प्रधान वैज्ञानिक 

  • ##submission.authorWithAffiliation##

    भा कृ अनु प -कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र -द्वितीय, जोधपुर 

    प्रधान वैज्ञानिक 

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प्रकाशित

2026-08-13