सतत कृषि में लाभकारी है मसूर उत्पादन
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मसूर न केवल पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों के लिए एक लाभकारी और बहुउद्देशीय फसल के रूप में भी उभर रही है। इसकी खेती में सिंचाई
एवं रासायनिक उर्वरकों की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और लाभांश में वृद्धि होती है। साथ ही, यह एक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने
वाली दलहनी पफसल है, जो मृदा की उर्वरता में सुधार कर पफसलचक्र को संतुलित बनाए रखने में सहायक होती है। परिणामस्वरूप, किसान बेहतर उपज के साथ-साथ टिकाऊ खेती की दिशा में भी आगे बढ़ते हैं। भारत में पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा दालों के आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच मसूर की उपयोगिता पुनः केंद्र में आ गई है। यह अब केवल पारंपरिक दाल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पोषण समृद्ध, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प के रूप में स्थापित
हो रही है। बदलते जलवायु परिदृश्य में यह पफसल देश की खाद्य प्रणाली को अधिक लचीला एवं टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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