जून के मुख्य कृषि कार्य
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जून माह कृषि कार्यों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसी समय दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के विभिन्न भागों में दस्तक देने लगता है और खरीफ फसलों की तैयारी शुरू हो जाती है। इस माह किसान खेतों की जुताई, मेड़बंदी, जल-संरक्षण तथा बीज एवं उर्वरकों की व्यवस्था जैसे आवश्यक कार्य करते हैं। खरीफ फसलों, जैसे-धान, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि का देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है और इनकी सपफलता कापफी हद तक मानसून की स्थिति पर निर्भर करती है। जून में धान की नर्सरी तैयार करने, चारा पफसलों तथा रेशेदार पफसलों की बुआई संबंधी कार्य भी किए जाते हैं। बारानी क्षेत्रों में ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी/मंडुआ के साथ-साथ तिलहनी पफसलें, जैसे सोयाबीन, मूंगपफली, सूरजमुखी, तिल, कुसुम व अरंडी; रेशेदार फसलें, जैसे-कपास एवं जूट तथा चारा पफसलें, जैसे-मक्का, ज्वार, बाजरा, लोबिया, ग्वार एवं ल्यूसर्न आदि की बुआई के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाते हैं। इस महीने कृषि कार्यों के सपफल निष्पादन के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मानसून के दौरान मौसम में अस्थिरता के कारण खरीपफ पफसलों में संभावित नुकसान को कम करने हेतु आकस्मिक फसल योजना के लिए आवश्यक संसाधनों, विशेषकर बीज, का प्रबंधन समय पर कर लेना चाहिए। फसलों के अनुसार आवश्यक उन्नत सस्य क्रियाओं का विवरण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।
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