कार्प मछलियों की अंगुलिकाओं का उत्पादन

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लेखक

  • नितेश कुमार यादव मात्स्यिकी महाविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, लेम्बुचेरा (त्रिपुरा)
  • अरुण भाई पटेल मात्स्यिकी महाविद्यालय, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, लेम्बुचेरा (त्रिपुरा)

सार

जलीय कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्प अंगुलिकाओं ;पिफंगरलिंगद्ध की आवश्यकताएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। पालन के तहत काप्र्स की अंगुलिकाओं में जीवित रहने का प्रतिशत अधिक और विकास का प्रदर्शन बेहतर होता है। इसलिए कार्प हैचरी से उत्पादित बीज को ग्रो-आउट तालाबों में भंडारण के लिए अंगुलिका अवस्था तक पाला जाता है। नर्सरी तालाबों में हैचरी से प्राप्त जीरा अवस्था को लगभग 25-30 मि.मी. आकार की पौना अवस्था के लिए 15-20 दिनों के लिए पाला जाता है। रियरिंग तालाबों में पौना अवस्था को 2-3 महीने के लिए लगभग 100 मि.मी. आकार की अंगुलिका अवस्था होने तक पाला जाता है।

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प्रकाशित

2023-03-17