कठिया गेहूं की उन्नत खेती

544 / 98

लेखक

  • अनुज कुमार बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • हितेश कुमार बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • अंकित कुशवाहा चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर-208002 (उत्तर प्रदेश)
  • विजय शर्मा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)
  • कमालुद्दीन बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा-210001 (उत्तर प्रदेश)

सार

गेहूं, विश्व में खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से मुख्य फसल है। भारत में भी इसकी अच्छी पैदावार होती है। इसका महत्व खाद्य सुरक्षा के साथ देश की आर्थिक स्थिति में स्थिरता लाने से भी संबंध्ति है। भारत में मुख्यतः दो प्रकार का गेहूं क्रमशः सामान्य एवं कठिया गेहूं उगाया जाता है। कठिया गेहूं सामान्य गेहूं के बाद द्वितीय स्थान पर सूखे क्षेत्रों में उगायी जाने वाली किस्म है। भारत में कठिया गेहूं की खेती लगभग 1.5 मिलियन हैक्टर क्षेत्रापफल पर की जाती है। इससे 3.5 मिलियन टन कठिया गेहूं का उत्पादन होता है। इसकी खेती मुख्यतः मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में शुष्क एवं कम पानी की उपलब्धता होने पर की जाती है। कठिया गेहूं की खेती मुख्यतः कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रा में की जाती है। इसकी खेती में लगभग 12 से 14 प्रतिशत प्रोटीन एवं प्र्रचुर मात्रा में बीटा कैरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ‘ए’ बनता है। साधारणतः सामान्य गेहूं में बीटा कैरोटीन की मात्रा नहीं पायी जाती। कठिया गेहूं का उपयोग दलिया, सूजी, पिज्जा, स्पेघेटी, सेवइयां, नूडल्स और शीघ्र पचने वाले पौष्टिक आहार बनाने में किया जाता है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2023-03-17