मार्च के मुख्य कृषि कार्य
662 / 64सार
इस माह कृषि कार्यों की दृष्टि से रबी फसलें पकने की अवस्था में आने लगती हैं। समय पर बोई गयी राई-सरसों की कटाई इस माह के प्रथम पखवाड़े में होनी शुरू हो जाती है। इसी प्रकार गेहूं, जौ, मसूर, चना, मटर, राई-सरसों, अलसी, गन्ना, आलू की पफसलें भी तैयार हो जाती हैं। गेहूं में दाने का पूर्ण भराव और दाना सख्त होने लगता है। बरसीम से बीज उत्पादन करना है, तो भी इस माह में विशेष सावधानियां रखनी पड़ेंगी। इससे अधिकतम उत्पादकता के साथ-साथ, उच्च गुणवत्ता वाला बीज भी प्राप्त हो सकेगा। इस माह में बसंतकालीन फसलों की बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है। बसंतकालीन मक्का, गन्ने के साथ ही ग्रीष्मकालीन दलहनी पफसलों की बुआई के लिए यह उपयुक्त समय होता है। इस माह में हरे चारे की कमी बहुतायत में देखी जाती है, इसलिए खाली हुए खेतों में ग्रीष्मकालीन चारे की फसलें जैसे-मक्का, बाजरा और ज्वार की बुआई कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। सब्जी, पफलदार पेड़ों और पुष्प व सुगंध वाले पौधों से भरपूर पैदावार लेने के लिए सस्य कृषि क्रियाओं की आवश्यकता होती है। इस लेख में इन सभी बातों पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।