अजोला है पौष्टिक चारे का विकल्प

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लेखक

  • राकेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • हरदेव राम भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • सन्दीप कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • राजेश कुमार मीना भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)

सार

अजोला तेजी से बढ़ने वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है, जो मुख्यतः जल की सतह पर तैरने हुए दिखाई देती है। इसका उपयोग पशु आहार के रूप में गाय, भैंस, बकरी, भेड़, शूकर, मछली और मुर्गियों आदि के लिये किया जाता है। इसमें प्रोटीन, खनिज लवण, अमीनो अम्ल, विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘बी12’ तथा बीटा-कैरोटीन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इसके कारण इसका उपयोग सान्द्र पफीड के प्रतिस्थान के रूप में किया जाता है। अजोला का अधिक चारा उत्पादन कम समय, स्थान एवं लागत में किया जा सकता है। यह पशुधन की उत्पादन लागत को कम करने के साथ-साथ किसानो की आय बढ़ाने में भी सहायक है।

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प्रकाशित

2023-05-12