सर्दियों में चारा फसलों की खेती

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लेखक

  • शिव मंगल प्रसाद भाकृअनुप-केन्द्रीय वर्षाश्रित उपजाऊ भूमि चावल अनुसंधान केन्द्र, हजारीबाग ( बिहार)
  • सुधांशु शेखर भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, कोडरमा
  • हिमानी प्रिया भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, (झारखण्ड)
  • सौम्य साहा भाकृअनुप-केन्द्रीय वर्षाश्रित उपजाऊ भूमि चावल अनुसंधान केन्द्र, हजारीबाग ( बिहार)
  • विभाष चन्द्र वर्मा भाकृअनुप-केन्द्रीय वर्षाश्रित उपजाऊ भूमि चावल अनुसंधान केन्द्र, हजारीबाग ( बिहार)

सार

भारत की लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि एवं उससे जुड़े अन्य व्यवसायों में संलग्न है। पशुपालन भी उन व्यवसायों में एक है, जो प्राचीनकाल से कृषि के साथ अपना लिया गया है। देश में लगभग 2 करोड़ लोग आजीविका के लिए पशुपालन पर आश्रित हैं। पशुपालन एक ओर जहां भूमिहीन श्रमिकों, छोटे एवं सीमांत कृषकों को आजीविका का साधन देता है, वहीं बड़े कृषकों को अतिरिक्त आय उपलब्ध करवाता है। पशुपालन से हमें दूध, मांस, जैविक खाद के साथ अनेक उद्योग धंधों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति होती है।

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प्रकाशित

2023-05-12