वार्षिक हरा चारा उत्पादन माॅडल

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लेखक

  • संदीप कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • राजेश कुमार मीणा भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • राकेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)

सार

पिछले कुछ वर्षों में नवीनतम प्रशिक्षण, नई तकनीकों और अनुसंधान कार्यों ने पशुपालन व्यवसाय को एक उच्च, उन्नत और सपफल व्यवसाय की श्रेणी में रखने की एक अहम भूमिका निभाई है। इसका आकलन देश के वर्तमान दुग्ध उत्पादन एवं उपयोग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। भारत में आज के समय में लगभग 209 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन हो रहा है, जो वर्ष 1950 के समय से कई गुना बढ़ोतरी के रूप में आंका गया है। यह भी सत्य है कि देश में प्रतिवर्ष दुग्ध उत्पादन की दर, विश्व के प्रति पशु औसत के लगभग आधे से भी कम है। इसके पीछे मुख्य कारण वर्षभर पौष्टिक चारा न होना एवं असंतुलित आहार है। देशभर में लगभग 35 प्रतिशत हरा चारा, 10 प्रतिशत सूखा चारा और 44 प्रतिशत दाना राशन की कमी पायी गई है। आमतौर पर किसानों को नवंबर-दिसंबर एवं अप्रैल-जून में हरे चारे की कमी का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

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प्रकाशित

2023-05-12